सुभिमल ‘चुन्नी’ गोस्वामी एक ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने फुटबॉल और क्रिकेट दोनों में भारत का मान बढ़ाया। फुटबॉल से रिटायरमेंट के बाद क्रिकेट में कमाल दिखाने वाले इस लीजेंड का 85 साल की उम्र में देहांत हो गया। उनकी यादें हमेशा ताजा रहेंगी।
मोहन बागान के स्टार के रूप में प्रसिद्धि पाई। 1962 एशियाड में कप्तानी में भारत ने गोल्ड जीता। फाइनल में साउथ कोरिया पर जीत उनके नेतृत्व का प्रमाण था। विंग पर उनकी स्पीड और स्किल्स कमाल की थीं।
क्रिकेट में 1963 से बंगाल का प्रतिनिधित्व किया। टेस्ट डेब्यू 1971 में इंग्लैंड के खिलाफ। पांच टेस्ट में ठीक-ठाक रन बनाए और कप्तानी में टीम को मजबूत बनाया। उनकी बैटिंग स्टाइल क्लासिक थी।
जीवनभर खेल के प्रति समर्पित रहे। प्रशासक के तौर पर भी योगदान दिया। चुनौतियों के बावजूद दोनो खेलों में सफलता हासिल की। आज के खिलाड़ियों के लिए उनका सफर सबक है।
बीसीसीआई से लेकर फुटबॉल एसोसिएशन तक श्रद्धांजलि दे रहे हैं। चुन्नी गोस्वामी की विरासत भारतीय खेलों का अभिन्न अंग बनी रहेगी।