पाकिस्तान को अल्पकालिक राहत मिली है, पर विकास की रफ्तार शून्य होने से फेलिंग स्टेट बनने का खतरा मंडरा रहा है। अर्थव्यवस्था के गहरे घावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
संदर्भ समझें: भंडार घटकर आयात के हफ्तों भर रह गए थे, महंगाई 38 प्रतिशत छू ली। अब आईएमएफ की 3 अरब डॉलर की योजना और सऊदी-चीन की मदद से मुद्रा स्थिर हुई। लेकिन उत्सव छोटा है।
विकास ठहरा हुआ। उद्योग सुस्त, निर्यात स्थिर, विदेशी निवेश भाग रहा। अमीर वर्ग सब्सिडी लूट रहा, गरीब सुधारों का खामियाजा भुगत रहे।
सुरक्षा चुनौतियां मुसीबत बढ़ा रही हैं। सीमावर्ती उग्रवाद रक्षा बजट निगल रहा। बाढ़ जैसी आपदाएं कृषि तबाह कर रही। युवा आबादी बिना कौशल के बम बन रही।
मार्ग प्रशस्त है: सरकारी कंपनियों का निजीकरण, टैक्स विस्तार, आईटी क्षेत्र को बढ़ावा। राजनीतिक एकता जरूरी। वैश्विक शक्तियां निगाह रखे हैं। सुधार न हुआ तो विनाश निश्चित।