भारतीय खेल प्रशासन में व्यापक परिवर्तन लाते हुए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खेल संगठनों के लिए क्रांतिकारी दिशानिर्देश अधिसूचित किए हैं। भ्रष्टाचार, पक्षपात और अपारदर्शिता के खिलाफ यह कदम ऐतिहासिक है।
मुख्य सुधार के तहत पदाधिकारियों के लिए 12 वर्ष का आजीवन कार्यकाल सीमा निर्धारित की गई है। इससे नई पीढ़ी को अवसर मिलेगा।
चुनाव लोकतांत्रिक बनेंगे—सभी मान्यता प्राप्त सदस्यों को समान वोट का अधिकार। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग और स्वतंत्र पर्यवेक्षक अनिवार्य।
वित्तीय मामलों में पूर्ण खुलासा जरूरी होगा। प्रायोजक अनुबंध, व्यय विवरण ऑनलाइन उपलब्ध होंगे। अनियमितताओं पर आपराधिक जांच संभव।
राष्ट्रीय खेल नीति आयोग गठित होगा जो अनुपालन की निगरानी करेगा। दोषी महासंघों का पंजीकरण रद्द हो सकेगा।
खिलाड़ी संघों को कार्यकारिणी में आरक्षण मिलेगा। एथलीट कल्याण, चिकित्सा बीमा और उत्पीड़न रोधी नीतियां लागू होंगी।
आईओसी की शिकायतों के बाद आए ये नियम वैश्विक मापदंडों पर खरे उतरते हैं। खेल मंत्री ने इसे ‘खिलाड़ी पहले’ की नीति बताया।
कार्यान्वयन चुनौतीपूर्ण होगा लेकिन ओलंपिक सफलता के लिए आवश्यक। संगठनों को तीन माह का समय दिया गया है अनुकूलन हेतु। भारत का खेल भविष्य अब सुसंगठित दिशा में अग्रसर है।