प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘विकसित भारत 2047’ के सफर में कोयले को अपरिहार्य बताया। ऊर्जा सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने जीवाश्म ईंधन को जल्दी खत्म करने के दावों को खारिज करते हुए घरेलू कोयला संसाधनों पर रणनीतिक निर्भरता पर बल दिया।
पीएम मोदी ने ऊर्जा परिदृश्य का विस्तृत चित्रण किया। नवीकरणीय ऊर्जा में विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए भी असंतत स्रोतों पर अति-निर्भरता से आगाह किया। कोयला उद्योगों और घरों को 24×7 बिजली देकर स्थिरता प्रदान करता है।
‘हमारे जैसे विकासशील देश आदर्शों के चक्कर में ऊर्जा संकट नहीं झेल सकते,’ उन्होंने कहा। सुपरक्रिटिकल तकनीकों से 40% तक उत्सर्जन घटाने की योजनाएं बताईं। कोयला उत्पादन विस्तार, माइन-माउथ प्लांट्स और सोलर हाइब्रिड का एकीकरण प्रस्तावित।
2047 तक बिजली मांग तिगुनी होने का अनुमान है। जिम्मेदार कोयला उपयोग पर फोकस से भारत न्यायपूर्ण ऊर्जा संक्रमण में अग्रणी बनेगा। 40 लाख कोयला श्रमिकों के रोजगार की रक्षा होगी।
चुनावी और आर्थिक दबाव के बीच यह नीतिगत निरंतरता निवेशकों का विश्वास बढ़ाएगी। कोयला के विकसित स्वरूप से आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य सुनिश्चित होगा।