दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था भारत और यूरोप की शक्ति जर्मनी के बीच द्विपक्षीय व्यापार ने 50 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ ही दोनों ने हरित ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य नवाचार और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में कई एमओयू पर दस्तखत किए हैं।
ये समझौते उस समय हुए हैं जब वैश्विक बाजार अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं। जर्मनी की ‘भारत रणनीति’ और भारत की सक्रिय कूटनीति ने इस साझेदारी को नई दिशा दी है। जी20 जैसे मंचों पर हुई चर्चाओं ने आधार तैयार किया।
आंकड़े बताते हैं कि पिछले वित्तीय वर्ष में व्यापार 52.3 अरब डॉलर रहा, जिसमें इंजीनियरिंग सामान, रत्न-आभूषण और आईटी सेवाओं का निर्यात बढ़ा। जर्मनी से उच्च प्रौद्योगिकी मशीनरी और वाहनों का आयात भी जोर पकड़ चुका है।
यह साझेदारी यूक्रेन संकट और सप्लाई चेन व्यवधानों के दौर में स्थिरता प्रदान करती है। जर्मनी भारत को चीन-विकल्प के रूप में देख रहा है, जहां 1800 से अधिक जर्मन कंपनियां कार्यरत हैं। इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी और रक्षा प्रौद्योगिकी में संयुक्त उद्यम की घोषणाएं हुई हैं।
जर्मन-भारतीय व्यापार संघ के प्रतिनिधियों ने इसे ‘गेम चेंजर’ करार दिया। गुजरात और तमिलनाडु में टेक पार्क और 10 अरब यूरो के हरित निवेश की प्रतिबद्धताएं की गईं। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे ‘मित्रता का नया अध्याय’ बताया।
2030 तक व्यापार दोगुना करने के लक्ष्य के साथ, ये एमओयू नवाचार और समावेशी विकास को प्रोत्साहित करेंगे। दोनों देशों के युवाओं के लिए आदान-प्रदान और स्टार्टअप इकोसिस्टम मजबूत होंगे, जो वैश्विक नैतिक व्यापार का नेतृत्व करेंगे।