स्मार्टफोन कंपनियों से सोर्स कोड मांगने वाली खबरें फर्जी साबित हुईं। केंद्र सरकार ने इन्हें सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कोई ऐसा फरमान जारी नहीं किया गया है।
रिपोर्ट्स में आरोप लगाया गया था कि मेइटी ने चीनी और अन्य विदेशी फर्मों को सॉफ्टवेयर कोड साझा करने का आदेश दिया, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा था। इससे बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई थी।
आधिकारिक बयान में मंत्रालय ने पुष्टि की, ‘ऐसी कोई नीति या प्रस्ताव नहीं है। हम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सहयोग पर भरोसा करते हैं।’ भारत का स्मार्टफोन बाजार 50 अरब डॉलर का हो चुका है, जिसमें पीएलआई से नई इकाइयां स्थापित हो रही हैं।
यह विवाद नियामकीय स्पष्टता की कमी को उजागर करता है। पिछले वर्षों में ऐप प्रतिबंध और डेटा नियमों पर भी इसी तरह की अफवाहें उड़ीं। काउंटरपॉइंट के आंकड़ों से पता चलता है कि पहली तिमाही में 15 करोड़ से अधिक यूनिट्स बिके।
सरकार और उद्योग के बीच निरंतर बातचीत से ही डिजिटल अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। 5जी रोलआउट और निर्यात वृद्धि के बीच यह खंडन निवेशकों का भरोसा बहाल करेगा। भारत वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की राह पर है।