रणदीप हुड्डा ने एक इवेंट में गहरी फिलॉसफी साझा की। हर मनुष्य में नेकी और बदी की शक्तियां छिपी हैं, लेकिन जीवन की परिस्थितियां ही फैसला लेती हैं कि कौन सी हावी होगी। ये विचार उनके व्यक्तिगत अनुभवों से उपजे हैं।
फिल्मों की दुनिया में कड़ी मेहनत, चोटें और सफलताओं ने उन्हें ये सिखाया। ‘दबाव में ही असली चेहरा निकलता है,’ उन्होंने उदाहरण देकर समझाया। वैज्ञानिक अध्ययन भी यही पुष्टि करते हैं।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि मानसिक मजबूती विकसित करें। ऑडियंस ने सराहना की और बहस छिड़ गई। ऑनलाइन ट्रेंडिंग हो रहा ये बयान। रणदीप की आने वाली फिल्मों के संदर्भ में ये और प्रासंगिक लगता है। जीवन के फैसलों पर पुनर्विचार करने का संदेश देता है।