पानी की कमी पर्यावरणीय समस्या से कहीं आगे बढ़कर स्वास्थ्य महामारी बन चुकी है। प्यास से परे यह किडनी फेलियर, हृदय रोग और दिमागी मंदी जैसी भयावह बीमारियां लाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किडनी प्रतिदिन 180 लीटर खून छानती है, जिसमें पानी जरूरी। कमी से टॉक्सिन जमा हो पथरी बनाते हैं। लैंसेट स्टडी कहती है, गर्म इलाकों में डिहाइड्रेशन किडनी फेलियर का जोखिम दोगुना करता है।
दिल मोटे खून से थकता है, हाई बीपी और स्ट्रोक का खतरा। न्यूरोलॉजिस्ट बताते हैं, मात्र 2% कमी से सिरदर्द, थकान और प्रोडक्टिविटी घटी। गर्भवती महिलाओं में प्रीटर्म लेबर, बच्चों में ग्रोथ रुकना आम।
कारण? शहरों में कोल्ड ड्रिंक्स की होड़, कैफीन डिहाइड्रेशन बढ़ाता है। मानसून फेल, ओवर-एक्सट्रैक्शन से सोर्स सूखे। हल: रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, स्कूलों में शिक्षा, नींबू पानी से दिन शुरू।
इनटेक ऐप्स से ट्रैक करें, रीयूजेबल बोतल साथ रखें। संकेत पहचानें – सूखा मुंह, चक्कर, गहरा यूरिन। हाइड्रेशन जीवित रहना है। गर्मी बढ़ेगी, तैयारी करें।