कल्पना करें- मोटी रस्सी तनी हुई, आठ पहलवान प्रति तरफ जूतों से जमीन खोदते, चेहरे तनाव से विकृत। रस्साकशी ओलंपिक का कच्चा रोमांच था, जो 1900 से 1920 तक पांच खेलों में धमाल मचाता रहा।
चीन, मिस्र व स्कैंडिनेविया के प्राचीन युद्ध अभ्यास से जन्मा। विक्टोरियन काल में लोकप्रिय होकर 1900 पेरिस में डेब्यू। उस समय ढीले नियमों से राष्ट्रीय मिश्रित टीमें हंगामा करतीं। स्वीडन-डेनमार्क भिड़ंत यादगार।
1904 सेंट लुइस में अमेरिकी पुलिस-फायर ब्रिगेड ने झाड़ा। 1908 लंदन में लिवरपूल पुलिस का थ्रिलर। 1912 स्टॉकहोम में इतालवी-अमेरिकी सरप्राइज। 1920 एंटवर्प में ब्रिटेन अजेय।
मेडल्स ने दौर दर्शाए- अमेरिका का औद्योगिक जोर, ब्रिटेन का साम्राज्य। रस्सी 10 सेमी मोटी, वजन 12-13 स्टोन। लंगर सहयोग से ‘डिप’ तकनीक जीत दिलाती।
1920 बाद IOC सुधारों से बाहर। अब 50+ देशों की फेडरेशन सक्रिय। वापसी की मांग तेज, ताकत खेलों में फिट।
रस्साकशी ओलंपिक कविता है- सरल नियम, गहन बंधन। यह राष्ट्रों को जोड़ती रही, विरासत अमर।