सर्वाइकल कैंसर जैसी बीमारी को वैक्सीन, जांच और तुरंत उपचार से हराया जा सकता है। एचपीवी संक्रमण से होने वाला यह कैंसर विकासशील देशों में महिलाओं का प्रमुख कारण है, लेकिन सटीक रणनीति से इसे समाप्त किया जा सकता है।
वैक्सीनेशन बचाव का सर्वोत्तम उपाय है। गार्डासिल जैसी वैक्सीन 9-12 साल की उम्र में लगवाएं, जो कैंसरकारी स्ट्रेन से 90 प्रतिशत सुरक्षा देती है। भारत की इंटेंसिफाइड मिशन इंद्रधनुष ने लाखों को कवर किया है। रवांडा में 90 प्रतिशत कवरेज से प्रीकैंसर केस घटे हैं।
स्क्रीनिंग समय पर खतरे का पता लगाती है। एचपीवी डीएनए टेस्ट और VIA ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आदर्श हैं। आशा कार्यकर्ता ट्रेंड होकर जांच कर सकती हैं। तमिलनाडु में नियमित चेकअप से हजारों मामले टले हैं।
उपचार में देरी घातक है। शुरुआती चरण में सरल प्रक्रियाओं से इलाज, उन्नत में सर्जरी-कीमो का संयोजन। पांच साल की जीवित रहने की दर 80 प्रतिशत से ऊपर पहुंच जाती है। केवल 20 प्रतिशत महिलाएं ही जांच करवाती हैं, इसलिए मोबाइल यूनिट जरूरी।
मिथक तोड़ें, शिक्षा फैलाएं। डिजिटल ऐप्स और सेलिब्रिटी कैंपेन मदद करेंगे। डब्ल्यूएचओ के 90-70-90 लक्ष्य से 2030 तक कैंसर मुक्त दुनिया संभव है। एकजुट होकर हम जीत सकते हैं।