वन तुलसी, जंगलों की शानदार औषधि, एंटीऑक्सीडेंट्स का भंडार है। सांस की बीमारियों को जड़ से मिटाती है और असीम ऊर्जा प्रदान करती है। ओसिमम ग्रेटिसिमम के नाम से जानी जाने वाली यह बूटी परंपरा और विज्ञान दोनों की पसंदीदा है।
सांस फूलना, घरघराहट या साइनस की समस्या? तुलसी के आवश्यक तेल यूजेनॉल ब्रोंकाई को खोलते हैं। दो हफ्ते नियमित सेवन से फेफड़ों की कार्यक्षमता 30 प्रतिशत बेहतर। ब्रोंकाइटिस और सर्दी-खांसी में रामबाण।
दैनिक थकान से परेशान? तुलसी माइटोकॉन्ड्रिया को सक्रिय कर एटीपी बढ़ाती है। स्ट्रेस से लड़ती है, एकाग्रता बढ़ाती है। एथलीट्स और ऑफिस वर्कर्स की चहेती।
उपयोग के आसान तरीके: तुलसी, अदरक और काली मिर्च का काढ़ा बनाएं। सलाद में ताजी पत्तियां डालें। घर में जंगल जैसा माहौल बनाकर उगाएं। बच्चों को कम मात्रा दें।
जलवायु परिवर्तन के दौर में वन तुलसी का महत्व बढ़ा है। इसे अपनाकर स्वस्थ और सशक्त बनें। प्रकृति का यह उपहार जीवन बदल देगा।