कल्पना करें, फ्रिज खराब हो जाए या अपरिचित को अस्पताल ले जाना पड़े। बिना तत्काल नकदी के घबराहट बढ़ जाती है। आपातकालीन निधि यही घबराहट दूर करती है।
यह नकद राशि जीवन की अप्रत्याशित चुनौतियों—नौकरी छूटना, मरम्मत, चिकित्सा बिल—के लिए आरक्षित होती है। आदर्श लक्ष्य: 3-6 महीने के आधारभूत खर्च। गिनती शुरू करें—आवास, भोजन, यात्रा, बुनियादी।
हर किसी को क्यों चाहिए? आंकड़े चिंताजनक हैं। भारत में भी करोड़ों लोग पे-टू-पे चले रहे हैं। एक दुर्घटना सब तबाह कर सकती है।
बनाने के 5 आसान कदम:
1. एक माह खर्च ट्रैक करें।
2. उच्च ब्याज वाली बचत खाता खोलें।
3. हर पगार से ₹1,000-5,000 ट्रांसफर करें।
4. ‘आपात’ की सख्त परिभाषा रखें।
5. इस्तेमाल के बाद तुरंत भरें।
फ्रीलांसर या एकमात्र कमाने वाले 9-12 महीने का लक्ष्य रखें। महंगाई 6% से ऊपर होने पर यह अनिवार्य है।
कोविड जैसी महामारी में तैयार घरों ने संकट झेले बिना निकले। आज एआई और ऑटोमेशन से नौकरियां खतरे में हैं।
₹10,000 से शुरुआत करें। धैर्य रखें। यह बचत नहीं, बल्कि जीवन रक्षा का हथियार है। आज ही प्लान बनाएं।