चीनी जहाजों की पूर्वी चीन सागर में गैस सर्वे पर जापान ने तीखा विरोध दर्ज किया है। विवादित क्षेत्र में चीन की गतिविधियां जापान के लिए खतरे की घंटी हैं, जो इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मान रहा है। रिपोर्ट्स में सामने आया है कि बीजिंग ने एकतरफा ड्रिलिंग शुरू की है।
यह क्षेत्र संकaku/डियाओयू द्वीपों के निकट है, जहां दोनों देश ऐतिहासिक दावे ठोंकते हैं। जापान के अधिकारियों ने इसे यूएनCLOS का उल्लंघन बताते हुए चीनी दूतावास को नोटिस भेजा। कोस्ट गार्ड ने निगरानी बढ़ा दी है।
ऊर्जा संकट के दौर में समुद्री संसाधन महत्वपूर्ण हैं। चीन अपनी ‘ब्लू इकोनॉमी’ को बढ़ावा दे रहा है, जबकि जापान आयात पर निर्भर है। 2010 के संकट की यादें ताजा हो गई हैं, जब जहाजों की टक्कर हुई थी।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जापान समर्थन जुटा रहा है, खासकर अमेरिका से। बीजिंग ने जापान के दावों को खारिज किया है। दोनों पक्षों को संवाद से ही विवाद सुलझाना होगा, वरना क्षेत्रीय शांति खतरे में पड़ सकती है। भविष्य की कूटनीति पर सबकी नजरें हैं।