एआई के बढ़ते शोर का दौर समाप्त हो रहा है और इसका फायदा भारत को मिल सकता है। एक विस्तृत रिपोर्ट में दावा किया गया है कि विदेशी निवेशक अब भारतीय बाजारों में अपनी पूंजी वापस ला सकते हैं।
एआई बूम के चरम पर एफआईआई ने भारत से करीब 20 अरब डॉलर निकाल लिए थे। निफ्टी और सेंसेक्स में भारी गिरावट आई। लेकिन अब जब एआई कंपनियों के मूल्यांकन सुधर रहे हैं, निवेशक विकल्प तलाश रहे हैं।
भारत की 7 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि, नियंत्रित मुद्रास्फीति और बढ़ती मध्यम वर्ग आबादी इसे अलग बनाती है। रिपोर्ट भारत को वैश्विक निवेश के शीर्ष गंतव्य के रूप में चिह्नित करती है।
वित्तीय सेवाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर और विनिर्माण क्षेत्रों पर नजर रहेगी। ऐतिहासिक आंकड़े दिखाते हैं कि टेक सुधार के बाद उभरते बाजार चढ़ते हैं।
रिपोर्ट 12-15 अरब डॉलर के निवेश का अनुमान लगाती है। चुनौतियां बनी रहेंगी, लेकिन मौका सुनहरा है। दिल्ली में नीतिनिर्माताओं का आत्मविश्वास बढ़ा है।