भारतीय एथलेटिक्स की दुनिया में हिमा दास का नाम सुनते ही जोश का संचार हो जाता है। फुटबॉल प्रेमी से स्प्रिंट क्वीन बनने तक का सफर संघर्षों से भरा रहा। वे पहली भारतीय महिला हैं, जिन्होंने 400 मीटर में इतिहास रचा।
दिंग के हिमा को बचपन में फुटबॉल ही सबकुछ लगता था। लेकिन कोच की सलाह पर दौड़ की दुनिया में कदम रखा। जल्द ही प्रतिभा का लहलहाता रूप सामने आया।
एशियाई खेलों में 50.79 सेकंड का समय न सिर्फ रजत पदक दिलाया, बल्कि नेशनल रिकॉर्ड स्थापित किया। एशियन जूनियर में गोल्ड, इंडियन ग्रैंड प्रिक्स में 200 मीटर रिकॉर्ड। रिले में टीम को कई मैडल्स दिलाए।
चोटों और महामारी ने रोका, लेकिन हिमा ने वापसी की। नेशनल चैंपियनशिप्स में जीत हासिल की। पद्मश्री सम्मान मिला। असम में युवाओं को ट्रेनिंग देने का बीड़ा उठाया।
पेरिस ओलंपिक की ओर बढ़ते कदमों से पूरा देश उत्साहित। हिमा दास सिद्ध करती हैं कि दृढ़ संकल्प से कोई लक्ष्य असंभव नहीं। फुटबॉल से विदाई लेकर दौड़ ने उन्हें अमर बना दिया।