पशुधन क्षेत्र भारत की कृषि को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है, जहां औसतन 12.77 प्रतिशत सालाना विकास दर्ज किया गया है। रिपोर्ट इस क्षेत्र की ताकत को रेखांकित करती है।
दairy से लेकर मीट और अंडे तक हर सेगमेंट फल-फूल रहा है। अमूल जैसे कोऑपरेटिव मॉडल किसानों को सीधा लाभ पहुंचा रहे हैं। आधुनिक तकनीक से उत्पादकता बढ़ी है।
उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु जैसे राज्यों में पशुधन 30 प्रतिशत से अधिक आय देता है। 20 मिलियन से ज्यादा परिवार इससे जुड़े हैं। सूखा प्रभावित इलाकों में यह जीविका का आधार है।
एआई, ड्रोन और डिजिटल ऐप्स क्रांति ला रहे हैं। पशु स्वास्थ्य और बाजार भाव की जानकारी तुरंत मिल रही है। विदेशी बाजारों में जैविक उत्पादों की मांग बढ़ी है।
चारा महंगा होना और जल संकट चुनौतियां हैं। हरी चारा और शून्य अपशिष्ट मॉडल जरूरी हैं।
आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में पशुधन की यह गति मील का पत्थर बनेगी। समावेशी विकास का प्रतीक है यह उभार।