ग्रेटर नोएडा के निवासी दूषित जल के जाल में फंस गए हैं, जहां आधिकारिक बयान और हकीकत आमने-सामने हैं। स्वास्थ्य जोखिम चरम पर पहुंच चुके हैं, महामारी का डर सता रहा है।
सोसायटी स्तर पर टेस्ट रिपोर्ट्स में सीसा, आर्सेनिक और मल-जनित बैक्टीरिया की मौजूदगी सामने आई। बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ी। ‘बॉयलर और फिल्टर के बावजूद खतरा बरकरार,’ निवासियों का गुस्सा फूट पड़ा।
जीएनआईडीए ने इन रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए घरेलू लापरवाही का ठीकरा फोड़ा। लेकिन कई सेक्टरों में एकसमान समस्या पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर उंगली उठाती है।
पर्यावरणविदों का मानना है कि गंगा नहर से आने वाला पानी अपशिष्ट के मिश्रण से जहरीला हो गया। प्रदर्शनकारियों ने बिल भुगतान रोक दिया है। तत्काल उपाय जरूरी: उन्नत शुद्धिकरण, निगरानी सिस्टम। अन्यथा, स्वास्थ्य संकट अनियंत्रित हो जाएगा।