दूषित पानी के कारण इंदौर में फैले हड़कंप के बाद अब हालात नियंत्रण में आ रहे हैं। अस्पताल भरे होने की स्थिति अब बदल चुकी है। भर्ती मरीजों की तादाद तेजी से घटी है और वर्तमान में केवल 54 का उपचार जारी है।
कई मोहल्लों में गंदे पानी से हजारों लोग बीमार पड़े। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारियों ने महामारी का रूप ले लिया था। निगम ने जल्दबाजी में आपूर्ति रोककर वैकल्पिक व्यवस्था की। जलाशयों की सफाई, अतिरिक्त क्लोरीन डालना और टेस्टिंग ने असर दिखाया।
नगर आयुक्त अमित तोमर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘हमारी सक्रियता रंग लाई। नए केस शून्य के करीब हैं।’ अस्पतालों से 200 से अधिक मरीज डिस्चार्ज हो चुके हैं। स्वतंत्र लैबों की रिपोर्ट्स भी बेहतर हैं।
फिर भी 54 मरीजों की स्थिति चिंताजनक है, खासकर कमजोर तबके के। कार्यकर्ता पुरानी पाइपलाइनों पर सवाल उठा रहे हैं। ‘दीर्घकालिक सुधार जरूरी हैं,’ उन्होंने जोर दिया। एमएलए ने जल बोर्ड की जवाबदेही सुनिश्चित करने का वचन दिया।
गर्मी के मौसम में यह घटना सबक है। लोग फिल्टर या बोतलबंद पानी अपनाएं। हाथ धोना और लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा लें। इंदौर की एकजुटता ने संकट कम किया। पूर्ण सामान्यता निकट है।