ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय और भारत डाक ने एमओयू पर दस्तखत किए। वित्तीय समावेशन और आपूर्ति श्रृंखला मजबूती पर जोर देते हुए यह गठबंधन डाक नेटवर्क की ताकत का उपयोग करेगा।
डाकघर अब बैंकिंग, रेमिटेंस और पार्सल वितरण के हब बनेंगे। किसानों को बीमा राशि या निर्माण सामग्री घर बैठे मिलेगी। ड्रोन से पहाड़ी इलाकों में डिलीवरी और ग्रामीण महिला समूहों के लिए सूक्ष्म ऋण प्रमुख विशेषताएं हैं।
आईपीपीबी मॉडल पर आधारित यह योजना 6 लाख गांवों को कवर करेगी। डेटा एनालिटिक्स से रूट ऑप्टिमाइजेशन होगा। पांच वर्षों में 50,000 नौकरियां सृजित होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसान आय 20% बढ़ सकती है।
आत्मनिर्भर भारत के अनुरूप यह कदम ग्रामीण विकास को गति देगा। निगरानी तंत्र से जवाबदेही बनी रहेगी। यह एमओयू ग्रामीण परिवर्तन का नया अध्याय लिखेगा।