बीमा उद्योग के लिए खुशखबरी! नए कानून में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति और रीइंश्योरेंस में राहत से भारत का बीमा बाजार तेजी से बढ़ेगा। यह बदलाव क्षेत्र को वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाएगा।
पिछले दशकों से 49 प्रतिशत एफडीआई सीमा विकास में बाधा बनी हुई थी। अब पूर्ण स्वामित्व से रणनीतिक साझेदारियां और तकनीकी हस्तांतरण संभव होगा। मैकिंसे जैसी संस्थाओं के अनुसार, प्रीमियम वृद्धि सालाना 15-20 प्रतिशत हो सकती है, बाजार आकार 2030 तक 200 अरब डॉलर पार करेगा।
रीइंश्योरेंस नियमों का सरलीकरण क्रांतिकारी है। घरेलू रीइंश्योरेंस पर बाध्यकारी सीमा हटने से लागत 20 प्रतिशत तक घटी है। जलवायु घटनाओं से बढ़ते दावों के बीच यह क्षमता बढ़ाएगा। आईआरडीएआई का कंपोजिट लाइसेंसिंग से लाइफ, हेल्थ और जनरल बीमा एक छत में आएगा।
एआई आधारित अंडरराइटिंग, ब्लॉकचेन क्लेम्स और डेटा से व्यक्तिगत पॉलिसी जैसी तकनीकें आएंगी। ग्रामीण और निम्न आय वर्ग तक पहुंच बढ़ेगी। शेयर बाजार में बीमा शेयरों में 5-7 प्रतिशत उछाल आया।
जोखिम जैसे विदेशी पूंजी निर्भरता को नियंत्रित करने की जरूरत है। उपभोक्ता संरक्षण मजबूत हो। यह सुधार 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य से जुड़ता है, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देगा और नागरिकों को अनिश्चितताओं से बचाएगा।