भारतीय शेयर बाजार में डिविडेंड, बोनस इश्यू और स्टॉक स्प्लिट निवेश की रणनीति का अहम हिस्सा हैं। ये न सिर्फ कंपनी की मजबूती दिखाते हैं, बल्कि शेयरधारकों को सीधा फायदा पहुंचाते हैं। हर निवेशक को इन्हें समझना चाहिए।
सबसे पहले डिविडेंड—कंपनी का लाभांश। फाइनल या इंटरिम, ये नकद या शेयर रूप में मिलता है। 2% यील्ड का मतलब है ₹100 शेयर पर ₹2 सालाना। आय चाहने वालों के लिए बेहतरीन, लेकिन एक्स-डेट पर कीमत प्रभावित होती है।
बोनस शेयर रिजर्व से मुफ्त उपहार हैं। 2:1 अनुपात में दो शेयर पर एक अतिरिक्त। शेयर संख्या बढ़ती है, कीमत घटती है, लेकिन मार्केट कैप वही। ये विकास का संकेत देते हैं और ट्रेडिंग को आसान बनाते हैं।
स्टॉक स्प्लिट मूल्य को सुलभ बनाता है। 1:10 स्प्लिट से ₹2000 शेयर ₹200 के 10 शेयर बन जाते हैं। वॉल्यूम बढ़ता है, खुदरा निवेशक जुड़ते हैं। अध्ययनों से साबित, स्प्लिट के बाद औसतन 15-20% उछाल।
टिप्स: रिकॉर्ड डेट चेक करें, स्क्रीनर इस्तेमाल करें। टैक्स में सावधानी बरतें। बाजार की उतार-चढ़ाव में ये एक्शन सुरक्षा कवच का काम करते हैं। ज्ञान से लैस होकर निवेश करें, लंबी दौड़ जीतें।