भारत के खदान मजदूरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाली नई श्रम संहिताओं की केंद्रीय मंत्री ने सराहना की। उन्होंने बताया कि सामाजिक सुरक्षा कोड से खनन श्रमिकों को व्यापक लाभ मिलेगा, जो उनके जोखिमों से निपटेगा।
खनन के खतरों जैसे गैस रिसाव, भूस्खलन और श्वास संबंधी बीमारियों पर फोकस करते हुए संहिताएं ईपीएफ, ग्रेच्युटी और बेरोजगारी भत्ता सुनिश्चित करती हैं। ठेका मजदूरों और मौसमी कामगारों को भी औपचारिक लाभ मिलेंगे। मंत्री ने कहा, ‘झारखंड से ओडिशा तक कहीं भी काम करने वाले मजदूर को अब चिंता मुक्त जीवन मिलेगा।’
तकनीकी एकीकरण महत्वपूर्ण है – यूनिफाइड लेबर पोर्टल से योगदान और क्लेम ट्रैकिंग आसान होगी। खनिज उत्पादन पर सेस से फंडिंग होगी। सुरक्षा के लिए वेंटिलेशन, मशीनरी और पीपीई के मानक सख्त होंगे।
छोटे खदानों में अमल की चुनौतियां हैं, इसलिए आकस्मिक निरीक्षण और हेल्पलाइन शुरू हो रही हैं। मजदूर यूनियनें त्रिपक्षीय वार्ता चाहती हैं। वैश्विक खनिज मांग के बीच मजबूत श्रमिक बल भारत को मजबूत बनाएगा। ये सुधार कल्याणकारी नीति का प्रतीक हैं।