भारत में ज्वेलरी को 86 प्रतिशत लोग अपनी प्रमुख संपत्ति मानते हैं, यह एक ताजा सर्वे से सामने आया है। दूसरी ओर, नई पीढ़ी भारी गहनों को छोड़ तेज रफ्तार ट्रेंड अपना रही है।
शादियों, त्योहारों और पारंपरिक रीति-रिवाजों में ज्वेलरी की डिमांड हमेशा बनी रहती है। लेकिन शहरों के युवा मिनिमलिस्ट लुक, मिक्स्ड मेटल्स और कस्टमाइज्ड पीस पसंद कर रहे हैं।
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ने इस बदलाव को गति दी है। चांदी और फ्यूजन ज्वेलरी की बिक्री में 25 प्रतिशत उछाल आया है।
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ती आय, पर्यावरण जागरूकता और तकनीकी सुविधाएं जैसे एआर ट्राय-ऑन इस ट्रेंड को बढ़ावा दे रही हैं। ज्वेलरी बाजार अब 100 अरब डॉलर के पार पहुंचने को तैयार है।
यह जनरेशनल शिफ्ट भारतीय आभूषण उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, जहां पुरानी परंपराएं नए रंगों में निखरेंगी।