पंजाब के होनहार पिस्टल शूटर अंगद वीर सिंह बाजवा अब कनाडाई झंडे तले निशानेबाजी करेंगे। यह खबर भारतीय खेल जगत में हड़कंप मचा रही है। कारण? घरेलू व्यवस्था की कमियां और विदेशी मौके。
अंगद का सफर प्रेरणादायक रहा। खेलो इंडिया गेम्स में स्वर्ण, जूनियर एशियन में रजत। लेकिन लगातार फंड की तंगी, अपर्याप्त गोला-बारूद और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर ने उन्हें तोड़ दिया। कनाडा शिफ्ट के बाद वहां की शानदार सुविधाओं से खुश हैं।
दोहरी नागरिकता ने प्रक्रिया आसान कर दी। 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक पर नजरें। पूर्व ओलंपियन गगन नारंग ने कहा, ‘ग्रासरूट स्तर पर सुधार जरूरी।’ सरकार और फेडरेशन पर दबाव बढ़ा।
फैंस दो गुटों में बंटे। कोई गर्व महसूस कर रहा, कोई दुखी। वैंकूवर में ट्रेनिंग जारी। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 उनका पहला बड़ा लक्ष्य।
यह घटना खेल नीतियों पर सवाल उठाती है। निवेश बढ़े, कोचिंग मजबूत हो तो टैलेंट पलायन रुकेगा। अंगद की उड़ान भारत को आईना दिखा रही है। बदलाव की बेला आ गई।