दलाल स्ट्रीट पर सोमवार को उदासी का आलम रहा जब शेयर बाजार तीसरे दैनिक सत्र में लाल निशान के साथ खुला। सेंसेक्स सूचकांक में खुलते ही लगभग 200 अंकों की फिसलन देखी गई, जो वैश्विक और स्थानीय कारकों से उपजी है।
सेंसेक्स 81,512 पर खुला, जिसमें 186 अंकों या 0.23 प्रतिशत की कमी थी। निफ्टी 24,790 के आसपास रहा। शुक्रवार को दोनों सूचकांक 1 प्रतिशत से अधिक गिरे थे।
मुख्य कारणों में मध्य पूर्व संकट से तेल कीमतों में उछाल शामिल है, जो भारत के आयात बिल को प्रभावित कर सकता है। कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजे और आरबीआई की सख्त नीति की आशंका ने बाजार को दबाया।
निजी बैंक जैसे अक्ष बैंक और कोटक महिंद्रा में 1.5 प्रतिशत तक की गिरावट आई। ऑटो और मेटल शेयर भी कमजोर रहे।
उपभोक्ता सामग्री और स्वास्थ्य क्षेत्रों में रिकवरी देखी गई। आईटीसी और डॉ. रेड्डीज में बढ़त हुई।
एफआईआई ने पिछले सप्ताह अरबों की बिकवाली की, जबकि डीआईआई ने संतुलन बनाया। अस्थिरता सूचकांक में 3 प्रतिशत की उछाल आई।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में बाजार मजबूत है। अमेरिकी फेड मिनट्स और जीडीपी आंकड़ों पर नजर है।