गर्भस्थ शिशु के विकास में हीमोग्लोबिन की कमी बाधा बन सकती है, जो मां के लिए भी घातक साबित होती है। इससे समयपूर्व डिलीवरी, बच्चे का कम वजन और मां को कमजोरी हो सकती है। भारत में 40% मामलों में यह देखा जाता है।
कारण स्पष्ट: आयरन की मांग बढ़ना, शाकाहारी भोजन और पुरानी कमी। लक्षण जैसे बर्फ खाने की इच्छा (पिका), सिरदर्द, नाखून कमजोर होना संकेत देते हैं।
समाधान सरल—आयरन सप्लीमेंट 100-200 एमजी रोज, खाली पेट। भोजन में चना, चुकंदर, सेब, मूंग दाल शामिल करें। विटामिन सी से अवशोषण दोगुना।
मासिक ब्लड टेस्ट करवाएं, फेरिटिन लेवल चेक करें। गंभीर केस में इंजेक्शन या ट्रांसफ्यूजन। घरेलू नुस्खे: आंवला जूस, गुड़-चने।
मुंबई की आशा ने 20 सप्ताह पर उपचार से स्वस्थ प्रसव किया। जीवनशैली बदलाव अपनाएं—पर्याप्त नींद, पानी। अंत में, सावधानी से गर्भावस्था को यादगार बनाएं।