शेयर बाजार में हड़कंप मच गया जब रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप 95,407 करोड़ रुपये घट गया। जून 2024 के बाद कंपनी के शेयरों में ऐसी भारी गिरावट कभी नहीं देखी गई।
शेयर प्राइस में 5 प्रतिशत से ज्यादा की कमी के साथ यह 2,698 रुपये पर बंद हुआ। सेंसेक्स में 500 अंकों की गिरावट आई, जिसमें रिलायंस का बड़ा हाथ रहा।
कच्चे तेल की गिरती कीमतें मुख्य वजह बनीं। ब्रेंट क्रूड 75 डॉलर के नीचे लुढ़क गया। रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल बिजनेस पर इसका सीधा असर पड़ा। वैश्विक मंदी के संकेतों ने निवेशकों को बेचने के लिए मजबूर कर दिया।
जियो के सब्सक्राइबर ग्रोथ में रफ्तार पकड़ने में देरी और रिटेल सेगमेंट में चुनौतियां बढ़ रही हैं। एफआईआई ने लगातार बिकवाली की, जिससे दबाव बना।
कंपनी की बैलेंस शीट मजबूत है, लेकिन भारी कर्ज और कैपेक्स निवेशकों को चिंतित कर रहे हैं। न्यू एनर्जी बिजनेस में भारी निवेश के बावजूद तत्काल फायदा नहीं दिख रहा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, स्टॉक अब सपोर्ट लेवल पर है। तिमाही परिणाम और अंबानी ग्रुप की रणनीति तय करेगी आगे का रुख। बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने के आसार हैं।