देश की रेल प्रणाली ने सामान्य और गैर-एसी कोचों के निर्माण में अभूतपूर्व रिकॉर्ड कायम किया है। यह प्रयास आम आदमी की यात्रा को सुगम बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
चेन्नई के इंटीग्रल कोच फैक्ट्री और रायबरेली के मॉडर्न कोच फैक्ट्री ने उत्पादन को 30 प्रतिशत बढ़ाया। इस साल की कुल संख्या पिछली ऊंचाइयों को पार कर गई।
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने इसे महत्वपूर्ण बताया, ‘ये कोच बिना रिजर्वेशन वाले सेगमेंट की रीढ़ हैं।’ मुंबई सबर्बन और हावड़ा-दिल्ली जैसी ट्रेनों में भीड़ कम होगी।
नए कोचों में हल्के एल्यूमिनियम, बेहतर वेंटिलेशन और बायो-टॉयलेट हैं। आरडीएसओ मानकों के अनुरूप सुरक्षा फीचर्स जोड़े गए।
इससे स्टील, अपहोल्स्ट्री और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में हजारों नौकरियां पैदा हुईं। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के छोटे आपूर्तिकर्ता लाभान्वित हुए।
चुनाव व त्योहारों को ध्यान में रखते हुए तैनाती तेज होगी। भविष्य में सोलर पैनल लगाने की योजना है।
रेलवे का यह कीर्तिमान आधुनिकता और समावेशिता का प्रतीक है, जो भारत की गति को गति देगा।