वैश्विक व्यापार के नए द्वार खोलने को भारत और रूस ने समुद्री क्षेत्र में गहन सहयोग की रूपरेखा तैयार की है। आर्कटिक मार्गों का दोहन और जहाज निर्माण में साझा प्रयास आर्थिक विकास की गति बढ़ाएंगे।
इस समझौते से उत्तरी समुद्री मार्ग विकसित होंगे, जो यूरोप-एशिया व्यापार को छोटा करेंगे। रूस की बर्फ तोड़ने वाली तकनीक भारत के शिपयार्ड्स के साथ मिलकर नई संभावनाएं रचेगी।
जहाज निर्माण को प्राथमिकता देते हुए संयुक्त संयंत्र स्थापित होंगे। उन्नत फ्रीजर्स और टैंकरों का उत्पादन दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। लागत में 40 प्रतिशत तक कमी का अनुमान है।
तेल, धातु और कृषि उत्पादों का आदान-प्रदान तेज होगा। बंदरगाह उन्नयन और नेविगेशन सिस्टम से लॉजिस्टिक्स सुधरेगी। रक्षा अभ्यास भी शामिल हैं।
हरित प्रौद्योगिकी और पारिस्थितिक सुरक्षा पर बल। तत्काल पायलट प्रोजेक्ट्स से कार्यान्वयन शुरू होगा। यह गठबंधन भारत-रूस संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।