केंद्रीय मंत्रालय के दिग्गजों ने हाइड्रोजन कार को परखा और इसे भविष्य का परिवहन माध्यम बताया। यह कदम सरकार के नवीकरणीय ऊर्जा वाहनों को प्राथमिकता देने के संकल्प को मजबूत करता है। प्रदूषण मुक्ति की इस दौड़ में हाइड्रोजन बड़ा रोल निभाएगा।
कार्यक्रम के दौरान मंत्रियों ने वाहन की स्पीड, रेंज और पर्यावरण अनुकूलता पर चर्चा की। जलवाष्प ही इसका इकलौता उत्सर्जन है, जो वायु गुणवत्ता सुधारने में मददगार होगा। देशभर के शहरों में ट्रायल शुरू होने की संभावना है।
नीतिगत स्तर पर गंभीर प्रयास जारी हैं। बजट में हाइड्रोजन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए करोड़ों आवंटित। सार्वजनिक-निजी साझेदारी से स्टेशन बनेंगे और तकनीक सस्ती होगी। इलेक्ट्रिक के साथ हाइड्रोजन को बराबरी का दर्जा मिलेगा।
उद्योगपति स्वागत कर रहे हैं। जापान-दक्षिण कोरिया जैसे देशों से तकनीक लेने की योजना। चुनौतियां हैं लेकिन समाधान के रास्ते खुले हैं। 2070 के नेट जीरो लक्ष्य को पाने में यह महत्वपूर्ण कड़ी बनेगा।
मंत्रियों की यह सवारी प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि व्यावहारिक बदलाव की शुरुआत है। आम आदमी तक हरित वाहन पहुंचेंगे, जिससे स्वच्छ भारत का सपना साकार होगा।