वित्त वर्ष 2026 में बैंकों का कुल ऋण पोर्टफोलियो 7 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा, जिसमें रिटेल लोनिंग का योगदान सबसे बड़ा रहा। यह आंकड़े उपभोक्ता मांग की मजबूती को दर्शाते हैं, जो अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
क्रेडिट कार्ड, शिक्षा ऋण और गोल्ड लोन जैसे उत्पादों ने रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की। फिनटेक कंपनियों के सहयोग से लोन डिस्बर्सल तेज हुआ। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भी रिटेल पर फोकस कर रहे हैं।
कॉर्पोरेट सेक्टर में ऋण विस्तार मंद रहा, जो वैश्विक मंदी का असर दिखाता है। आरबीआई ने लिक्विडिटी बढ़ाकर बैंकों का साथ दिया। फिर भी, एनपीए जोखिम पर नजर रखी जा रही है।
भविष्य में 12-15 प्रतिशत की ग्रोथ संभव है। यह बदलाव वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दे रहा है। उधारकर्ताओं को जिम्मेदारी से ऋण लेने की सलाह दी जाती है। रिटेल क्रेडिट भारतीय बैंकिंग का नया इंजन बन चुका है।