सऊदी के जेद्दा में क्रॉसफायर की भेंट चढ़े झारखंड के विजय कुमार महतो का पार्थिव शरीर 120 दिनों के इंतजार के बाद रांची पहुंचा। लेकिन परिवार ने अंतिम संस्कार से पहले मुआवजे पर लिखित प्रतिबद्धता की मांग रखी और शव लेने से इंकार कर दिया। गिरिडीह जिले के विजय ट्रांसमिशन लाइन प्रोजेक्ट पर लगे थे। 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस-गैंग झड़प में वे जख्मी हुए और बाद में चल बसे।
रिम्स अस्पताल की मोर्चरी में शव रखा गया है। साले राम प्रसाद महतो बोले, कंपनी साफ नहीं बोल रही कि मुआवजा कितना-कैसे मिलेगा। विजय के पीछे पत्नी, दो नन्हे बेटे और वृद्ध मां-बाप हैं। बिना भरोसे के आगे नहीं बढ़ेंगे।
झारखंड सरकार ने 5 लाख की मदद का वादा किया, लेकिन परिवार चाहता है नियोक्ता स्पष्ट हो। राज्य माइग्रेंट सेल की शिखा लाकड़ा ने कहा, सऊदी कोर्ट में केस चल रहा है। मुआवजा उसी के फैसले से तय होगा। दूतावास की मदद से शव लाने में सहायता की गई।
प्रवासी भारतीयों की यह पीड़ा आम हो चुकी है। खाड़ी देशों में कामगारों की मौत पर देरी, कानूनी पेचीदगियां और अनिश्चित सहायता परिवारों को तोड़ देती हैं। सरकारें और कंपनियां मिलकर ऐसी स्थितियों के लिए पूर्व तैयारियां करें, ताकि शोक पर शोक न जुड़े। अभी परिवार डटा है, इंतजार अंतहीन सा लग रहा।