महिला दिवस पर विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय ‘भारती-नारी से नारायणी’ राष्ट्रीय अधिवेशन ने महिलाओं के मुद्दों को नई दिशा दी। भाजपा की सांसदों संध्या वर्मा, आनंदमूर्ति गुरुमां, सुमित्रा बाल्मिक, कविता पाटीदार, माया नारोलिया के साथ आध्यात्मिक गुरु योगिनी मुक्ति नाथ, स्वामी मैत्री गिरी, साध्वी अनादि सरस्वती, साध्वी सुनीता शास्त्री और मृदुला प्रधान उपस्थित रहीं।
महिला उत्थान और बंगाल की परिस्थितियों पर विचार-विमर्श हुआ। मृदुला प्रधान ने कहा, यह भारतीय विद्वान परिषद का सराहनीय प्रयास है। समाजनायिका महिलाओं का जमावड़ा प्रेरणादायी है। इन्हें मुख्य भूमिका में लाने हेतु ऐसे मंच बार-बार लगने चाहिए। नारी में शक्ति है, बस आत्मबल चाहिए।
महामंडलेश्वर मैत्री गिरी ने नारी शक्ति की ऐतिहासिक भूमिका याद दिलाई। साध्वी अनादि ने सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ी महिलाओं की विविध भूमिकाओं पर प्रकाश डाला। साध्वी सुनीता ने मातृत्व के संस्कारों के ह्रास पर चिंता जताई।
सम्मेलन ने महिलाओं को नई ऊर्जा प्रदान की, राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को रेखांकित करते हुए।