केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सम्मान में की गई चूक पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति का स्थान राजनीति से उच्चतर है। दार्जिलिंग में उनके दौरे के दौरान हुईं असुविधाओं को राष्ट्रीय शर्मिंदगी बताया।
सिलीगुड़ी महकमा परिषद के फांसीदेवा में राष्ट्रपति के आगमन पर राज्य के किसी वरिष्ठ अधिकारी ने प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन को बिधाननगर से गोशाईपुर स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे आयोजन प्रभावित हुआ। विशाल मैदान की बजाय छोटी जगह चुनी गई, जिससे लोग दूर रह गए।
राष्ट्रपति मुर्मू ने भावुक होकर कहा, ‘प्रशासन के मन में क्या था, पता नहीं। यहां तो लाखों समा सकते थे, फिर भीड़ का हवाला? संथाल भाइयों-बहनों को आने में कठिनाई हुई।’ उन्होंने मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति पर हैरानी जताई और खुद को बंगाल की बेटी बताते हुए ममता दीदी से रिश्ते का जिक्र किया।
रिजिजू ने एक्स पर पोस्ट कर गुस्सा जाहिर किया, ‘पहली आदिवासी राष्ट्रपति की पीड़ा असहनीय है। यह संविधान और आदिवासी गौरव पर कोप है।’ वीडियो शेयर कर उन्होंने सीएम के कदम को शर्मनाक कहा।
यह मामला राजनीतिक रंजिशों को दर्शाता है। राज्य में तृणमूल की नीतियां केंद्र के प्रयासों से टकरा रही हैं। आदिवासी वोट बैंक महत्वपूर्ण होने से यह विवाद चुनावी रंग ले सकता है। संवैधानिक मर्यादा बनाए रखना हर सरकार की जिम्मेदारी है। ऐसी घटनाएं लोकतंत्र की नींव को कमजोर करती हैं।