कश्मीर घाटी में अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत ने शोक और आक्रोश का माहौल बना दिया। यूएस-इजरायल हमलों से उनकी मौत की खबर के बाद 1 मार्च से विरोध रैलियां तेज हो गईं। शिया बहुल इलाकों में श्रीनगर के लाल चौक से लेकर बडगाम, बारामूला तक लोग सड़कों पर। खामेनेई के चित्र हाथों में, दुश्मनों के खिलाफ नारेबाजी और पुतले जलाए गए।
पुलिस की हल्की कार्रवाई में आंसू गैस व डंडों से कई गिरफ्तारियां हुईं, जिनमें शांतिपूर्ण रैलियों की महिलाएं भी शामिल। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने शनिवार को सोशल मीडिया एक्स पर जेकेई पुलिस को पत्र लिखा सरीखा संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि शहादत के शोक में शांति से शामिल लोगों को हिरासत से मुक्त करें। परिवारों को रिहाई का वचन दिया गया था, जो पूरा न हुआ। जल्द विचार करें। महबूबा ने हमलों को क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बताया और केंद्र की चुप्पी पर प्रहार किया।
डीजीपी से अपील की कि स्थिति को संयम से संभालें। शोक व एकजुटता का हक सबका है, इसे अपराध न बनाएं। ये घटनाएं कश्मीर की वैश्विक घटनाओं से संवेदनशीलता को उजागर करती हैं। महबूबा का हस्तक्षेप तनाव कम करने का संकेत देता है।