राजधानी दिल्ली में महिला दिवस के पूर्व शनिवार को ‘भारती-नारी से नारायणी’ नामक दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन हुआ। राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख सदस्य भाग्यश्री साठे ने इसमें भाग लेते हुए महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए।
महिला दिवस को वे केवल समारोह नहीं मानतीं, बल्कि महिलाओं की गरिमा, अधिकार और सामाजिक सहभागिता को प्रोत्साहन देने का माध्यम बताती हैं। वैश्विक स्तर पर 8 मार्च के आसपास अनेक आयोजन होते हैं, पर यह सम्मेलन विशेष है क्योंकि यह महिला दिवस के मूल उद्देश्यों को भारतीय दृष्टिकोण से पुनर्जीवित कर रहा है।
कार्यक्रम का लक्ष्य लिंगों के बीच सामंजस्य और आदर भाव जगाना है, जिससे महिलाओं की भूमिका को बल मिले। साठे जी ने बताया कि पूरे भारत में सशक्तीकरण की लहर चल रही है। नीतिगत प्रयासों के साथ संगठन और परिवार महिलाओं को प्रोत्साहित कर रहे हैं। अब वे हर विधा में छा रही हैं।
स्वामी विवेकानंद की गरुड़ उपमा का जिक्र करते हुए उन्होंने जोर दिया कि समाज के दोनों पंख समान रूप से शक्तिशाली हों, तभी उन्नति संभव है। महिलाओं की प्रगति सराहनीय है, फिर भी समता, सम्मान और अवसरों के लिए सतत कार्य अनिवार्य है। यह प्रयास देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।