एलपीजी के दामों में शनिवार को हुई वृद्धि ने आम जन को झकझोर दिया। घरेलू उपभोक्ताओं पर 60 रुपये, व्यवसायियों पर 114.50 रुपये अतिरिक्त भार। महंगाई के दौर में यह फैसला लोगों के सब्र का बांध तोड़ गया।
दिल्लीवासी बोले, ‘आवश्यक वस्तुओं पर लगाम लगे। हर दिन नई मार।’ महिला ने शिकायत की, ‘रसोई का खर्चा अब मुश्किल।’ प्रेम लता ने पूछा, ‘युद्ध वहां, महंगाई यहां—गरीबों का क्या?’
ईरान पर हमलों को कंचन ने कारण बताया। पुणे में आवाजें उठीं, ‘उछाल सीमित हो। घर-रेस्तरां सब प्रभावित। गृहिणियां सबसे ज्यादा परेशान।’ पूजा गिरी ने चेताया, ‘हर वर्ग हिट, गरीब सबसे बुरी तरह।’ राकेश बोले, ‘शीघ्र सामान्यता लाएं।’
विशेषज्ञों ने मध्य पूर्व संकट को ऊर्जा मूल्यों का जिम्मेदार ठहराया। आपूर्ति चेन डगमगाई, तेल भंडार चिंता में। भारतीय परिवार किफायत से जीने को विवश। क्या सरकार कदम उठाएगी?