मिजोरम विश्वविद्यालय के 20वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए आइजोल में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने स्नातक छात्रों को विकसित भारत अभियान का नेतृत्व संभालने का संदेश दिया।
परिसर की प्राकृतिक छटा से प्रभावित होकर उन्होंने इसे शिक्षा की शांति आधारित उपलब्धि का उदाहरण बताया। पूर्वोत्तर के विकास की कहानी को प्रधानमंत्री मोदी के विजन से जोड़ते हुए बैरबी-सैरांग रेल, उड़ान और पीएम-डिवाइन पहलों का जिक्र किया।
ये प्रयास क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं। युवाओं से अपील की कि वे अवसर रचने वाले बनें, न कि केवल तलाशने वाले। पर्यटन से बांस उत्पादों, जैविक कृषि, शिल्पकला और डिजिटल सेवाओं तक की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
युवाओं में नशे की लत की समस्या पर गहरी चिंता व्यक्त की तथा नशामुक्त, अनुशासित और प्रौद्योगिकी के स्वामी बनने का आग्रह किया। मिजोरम की जैव विविधता, साक्षरता, सांस्कृतिक धरोहर और पर्यावरण संवेदनशीलता का गुणगान किया।
सौर ऊर्जा से चलने वाले इस विश्वविद्यालय को आदर्श बताते हुए स्थिरता के प्रति युवाओं से प्रतिबद्धता की मांग की। यह संबोधन नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।