आज अनुपम खेर का जन्मदिन है, जिन्होंने ‘सारांश’ जैसी फिल्म से करियर की शुरुआत की। युवा उम्र में बुजुर्ग बने और हिंदी सिनेमा को नई परिभाषा दी। 550 फिल्मों का लंबा सफर पूरा कर आज उनके पास वैभव है, लेकिन याददाश्त खोने का डर बरकरार।
मस्ती भरे अंदाज में जीवन जीने वाले अनुपम खुद के प्रशंसक हैं। संघर्ष से शोहरत तक पहुंचे, हर अनुभव को संग्रहित किया। तारीखें और घटनाएं उनकी स्मृति में ताजा रहती हैं, क्योंकि वे जीवन को सिनेमाई कहानी मानते हैं।
मुंबई आने की कहानी दिलचस्प है। लखनऊ में पढ़ाते हुए एक विज्ञाप में एक्टिंग अकादमी का मौका मिला- वेतन 5000 और आवास। उत्साहित होकर रवाना हुए, लेकिन सारा वादा झूठा। इस धोखे ने उन्हें मजबूत बनाया, बुरे पलों को भी हंसी में बदल दिया।
अनुपम खेर की यह बातें जन्मदिन पर याद दिलाती हैं कि भौतिक उपलब्धियां क्षणिक हैं, यादें अमर। उनका संघर्ष युवाओं के लिए मिसाल है।