बिहार में राजनीतिक भूचाल आ गया है। आरजेडी नेता शक्ति यादव ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भाजपा और केंद्र का दबाव बनाकर उन्हें राज्यसभा भेजा गया। बंद कमरे में एक घंटे चली बैठक में यह तय हुआ, जब नीतीश का मन तैयार नहीं था।
अमित शाह की उपस्थिति में नामांकन भरने से पहले नीतीश ने सोशल मीडिया पर अपनी सहमति जताई। लेकिन यादव इसे मजबूरी का आलम बता रहे हैं। विपक्ष ने सीएम के फैसले पर सवालों की बौछार कर दी है।
‘हम नीतीश जी के साथ सहानुभूति रखते हैं। स्वस्थ रहें, यही कामना है। मगर यह भाजपा की चाल है। हड़बड़ी क्यों? चुनाव में जनादेश नीतीश के नाम पर मिला था। जदयू समर्थक इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।’
चुनावी नारा ’25-30 फिर नीतीश’ अब हकीकत से कोसों दूर। तेजस्वी की चेतावनी सत्य सिद्ध हुई। जदयू में डर का साया है। वरिष्ठ नेता भयभीत, जमीनी स्तर पर रोष भरा। हालात बता रहे हैं कि जदयू का विघटन करीब है। सत्ता गठबंधन में दरारें साफ दिख रही हैं।