नई दिल्ली में राजनीतिक तलवारें भिड़ीं जब विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने आप की आतिशी को पत्र लिखकर उनकी प्रेस ब्रीफिंग को कोसा। आतिशी ने विधानसभा परिसर को ‘फांसी घर’ बताते हुए समन का बचाव किया, जिसे स्पीकर ने बिना सबूत का बताया।
पत्र में गुप्ता ने साफ कहा, ‘आतिशी अगर ‘फांसी घर’ पर भरोसा रखती हैं तो समन पाए नेताओं- केजरीवाल, सिसोदिया, गोयल, बिड़ला- से विशेषाधिकार समिति में प्रमाणित सबूत मंगवाएं।’ उन्होंने जोर दिया कि समिति के सवाल पर विपक्ष नेता को बयानबाजी नहीं करनी चाहिए।
स्पीकर ने अतीत की तुलना में वर्तमान विधानसभा की स्वायत्तता पर बल दिया, जब आप के समय समितियों का कथित दुरुपयोग हुआ। आतिशी को सलाह दी कि राजनीतिक फायदे के चक्कर में सदन की समितियों का अपमान न करें।
मामला 2022 का है जब केजरीवाल ने ब्रिटिश काल के ‘फांसी घर’ के नाम से जगह का उद्घाटन किया। गुप्ता ने हाल ही में ऐतिहासिक नक्शों से पर्दाफाश किया कि वह ‘टिफिन रूम’ मात्र था, फांसी का कोई जिक्र नहीं।
यह पत्र न केवल आतिशी को चेतावनी है बल्कि दिल्ली विधानसभा में बदलते समीकरणों का संकेत भी। भाजपा के नेतृत्व में अब प्रक्रियाएं पारदर्शी हो रही हैं, जबकि आप को चुनौतियां मिल रही हैं। आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें।