मीठी नदी गाद निकासी घोटाले में ईओडब्ल्यू ने कोर्ट में 7,000 पन्नों का दूसरा सप्लीमेंट्री चार्जशीट सौंपा। किला कोर्ट में दाखिल इस दस्तावेज में महेश पुरोहित व सुनील उपाध्याय समेत दो गिरफ्तार आरोपियों का जिक्र है। 39 गवाहों की शहादत इसे मजबूत बनाती है।
आरोप है कि इन्होंने किसानों के नाम जाली समझौते बनाकर डंपिंग साइट्स की मंजूरी ली और बीएमसी से पैसे ऐंठे। 2013-2023 के बीच यह साजिश चली, जिसमें अधिकारी-ठेकेदारों का गठजोड़ फर्जी बिलों से करोड़ों उड़ा ले गया। दिसंबर में दोनों पकड़े गए।
फर्जी वजन-पर्ची व रजिस्टर ने धोखे को परफेक्ट बनाया। पहले राठौर के खिलाफ 1,300 पेज की चार्जशीट आई थी। प्रोजेक्ट का मकसद नदी साफ करना था, लेकिन सिर्फ कागजों पर काम दिखा। एसआईटी से ईओडब्ल्यू को मिला केस अब गहरा रहा है।
मुंबई की बरसाती मुसीबतों के बीच यह घपला शर्मनाक है। करदाताओं का पैसा लुटा, नदी वैसी की वैसी। कोर्ट की कार्रवाई से बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं, जो भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएगी। जांच जारी है।