जम्मू-कश्मीर में ईरान पर हमलों के विरोध में चले व्यापक बंद को मीरवाइज उमर फारूक ने जीवंत नैतिक चेतना का प्रतीक बताया। श्रीनगर से जम्मू तक मुसलमानों की एकता पीड़ितों के प्रति अटूट समर्थन दिखाती है।
बुधवार का यह बंद शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति का मजबूत उदाहरण था। लेकिन प्रदर्शनकारियों, जिसमें महिलाएं-बच्चे शामिल हैं, की गिरफ्तारियां चिंताजनक हैं।
मीरवाइज ने जोर देकर कहा कि आहत भावनाओं को व्यक्त करने का हक सुरक्षित रहना चाहिए। फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर एफआईआर और मीडिया खातों पर पाबंदी असंवैधानिक है।
सभी बंदियों को तत्काल रिहा करें और बोलने की आजादी पर अंकुश लगाने की रणनीति बदलें, उन्होंने अपील की।
दूसरी ओर, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने ईरान बमबारी और खामेनेई की शहादत पर सरकार की मौन साधी की आलोचना की।
उन्होंने प्रेस मीट में याद दिलाया कि कठिन समय में ईरान ने भारत को मुफ्त तेल उपलब्ध कराया था। मुफ्ती ने कहा कि सत्ताधारियों की चुप्पी से जनता को अपराधी ठहराना गलत है।
ये बयान क्षेत्र में स्वतंत्रता और सुरक्षा के बीच संतुलन की मांग करते हैं।