स्वास्थ्य का आधार है आयुर्वेदिक आहार। रात्रि भोजन के नियम शास्त्रों में स्पष्ट हैं। पूर्ण उपवास न करें, बल्कि हल्का सुपाच्य भोजन समय पर ग्रहण करें। इससे दीर्घायु और निरोगी काया मिलती है।
भारी पदार्थ तमोगुण बढ़ाते हैं। गड़बड़ समय अग्नि दूषित कर रोगों को न्योता देता। नवीन गर्म भोजन रोगाणुओं से बचाव।
कमजोर जठराग्नि वाले हल्का आहार लें। पूर्ण विरति वैद्य निर्देश पर।
अग्नि रक्षा मूल मंत्र। सायंकाल अग्नि शिथिल, अत भारी निषिद्ध। चरक: रात्रौ लघु स्निग्ध। हृदय: रात्रौ लघु भुंजीत।
विज्ञान मान्य: रात्र चयापचय मंद, तैलीय-मधुर कठिन। फलस्वरूप अपच, अम्लता, स्थूलता, अनिद्रा।
उपयुक्त: खिचड़ी, दाल-तरकारी, पतली रोटी, सत्तू, शाक सूप, दुग्ध। वर्जित: दधि, मांस, भृतपक्व, रसगुल्ला, पुराण।
काल: सूर्यास्तोत्तर 2-3 घंटे, शयन पूर्व 2 घंटे। श्रेष्ठ 6 से 8। पाच्यं स्वस्थं निद्रा।