सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए पंचांग अनिवार्य है, जो हर दिन के मुहूर्तों का खजाना होता है। 5 मार्च गुरुवार को कृष्णपक्ष द्वितीया शाम 5:03 तक, फिर तृतीया। उदयातिथि से दिन भर द्वितीया।
नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी सुबह 8:17 तक, फिर हस्त। शूल योग 7:46 तक समाप्त, गर करण 5:03 तक।
उत्तम समय: ब्रह्म मुहूर्त 5:04-5:53। अभिजित 12:09-12:56 में विजय मुहूर्त 2:30-3:16 का योग—नए काम, पूजा-पाठ हेतु आदर्श। गोधूलि 6:21-6:46।
सूर्योदय 6:42, अस्त 6:23। अमृतकाल 3:11 से अगले दिन 4:52।
सावधान रहें: राहु दोपहर 2-3:28, यमगंड 6:42-8:10, गुलिक 9:37-11:05 व 3:16-4:03। दुर्मुहूर्त 10:36-11:23 व 3:16-4:03। भद्रा का प्रभाव गुरुवार पर।
इस दिन नारायण, विजयदायिनी पितांबरा व गुरु बृहस्पति की आराधना करें। पीले रंग की सामग्री जैसे केला, हल्दी, गुड़-चने दाल व मिठाई भोग लगाएं। पंचांग से जीवन सुगम बने।