केरल में भाषाई गौरव को नई ऊंचाई देने की कवायद तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने मंगलवार को राज्यपाल राजेंद्र वी. आर्लेकर से मलयालम भाषा विधेयक को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने इसे सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा और मलयाली मान का प्रतीक बताया।
चंद्रशेखर ने जोर देकर कहा कि यह विधेयक शासन-प्रशासन में मलयालम को स्थापित करने का ऐतिहासिक प्रयास है। प्रधानमंत्री से हालिया भेंट में सांस्कृतिक नेताओं द्वारा ‘केरल’ नाम की मान्यता पर धन्यवाद ज्ञापित करते हुए विधेयक मंजूरी की बात उठाई गई थी।
इससे राज्य की प्रतिष्ठा बढ़ेगी और लोगों में गर्व की लहर दौड़ेगी। नाम परिवर्तन की तर्ज पर आधिकारिक पत्राचार व सेवाओं में मलयालम अपनाने से सरकारी संवाद अधिक प्रभावी होगा। शासन प्रक्रिया सरल, स्पष्ट व जनोन्मुखी बनेगी।
युवा वर्ग भाषा से भावुक जुड़ाव कायम कर सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखेगा। चंद्रशेखर ने साफ लहजा अपनाते हुए कहा कि अन्य भाषाओं का कोई नुकसान नहीं होगा। अंग्रेजी-हिंदी शिक्षा व रोजगार के द्वार खोले रखेंगी।
कार्यान्वयन चरणबद्ध हो, जिसमें अल्पसंख्यक हित सुरक्षित रहें। नियमावली निर्धारित हो, अनुवाद तंत्र मजबूत बने, बहुभाषी सुविधाएं हों तथा सीमांचल जिलों के लिए खास प्रावधान सुनिश्चित किए जाएं। यह संतुलित दृष्टिकोण केरल की एकता को मजबूत करेगा।