देश की आर्थिक नींव को हिलाने वाली फर्जी नोटों की साजिश पर विशाखापत्तनम एनआईए अदालत ने सातवां प्रहार किया। 2015 के एफआईसीएन केस में सातों आरोपी दोषी करार दिए गए, जिन्हें यूएपीए के तहत 7 से 10 साल की जेल व जुर्माने की सजा मिली। यह अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क के खिलाफ मजबूत जवाब है।
असम से सद्दाम हुसैन व अमीरुल हक, पश्चिम बंगाल से रोस्तम व हकीम शेख, कर्नाटक से सद्दाम हुसैन व सैयद इमरान, तथा असम के अकबर अली शामिल। एनआईए जांच ने उजागर किया कि बांग्लादेश सीमा से आने वाले बेहतरीन नकली नोट देश के कोने-कोने में घुसे थे, वित्तीय अस्थिरता पैदा करने के इरादे से।
सबसे कड़ी सजा बरपेटा सद्दाम को: धारा 16 में 10 वर्ष व 5 हजार जुर्माना। डीआरआई ने उन्हें रेलवे स्टेशन पर लाखों के फर्जी नोटों संग दबोचा। अमीरुल हक को धारा 18 में वैसी ही सजा। रोस्तम, बेंगलुरु सद्दाम, इमरान व अकबर को धारा 20 में 7-7 वर्ष व 2 हजार जुर्माना (न देने पर 8 माह जेल)। हकीम शेख को 8 वर्ष व 5 हजार। इमरान पर दोबारा मुकदमा।
केस डीआरआई से एनआईए को मिला, चार्जशीटें समय-समय पर दाखिल। अदालत का यह निर्णय न केवल दोषियों को सजा देता है, बल्कि भविष्य की साजिशों को कुचलने का संदेश भी देता है, राष्ट्र की मुद्रा प्रणाली को सुरक्षित रखते हुए।