तमिलनाडु में सियासी घमासान मचा हुआ है। भाजपा ने डीएमके सरकार को केंद्र सरकार के सुरक्षा अलर्ट की अवहेलना कर ईरान के समर्थन में आयोजित प्रदर्शनों को हरी झंडी दिखाने पर आड़े हाथों लिया है।
भाजपा के राज्य प्रवक्ता ए.एन.एस. प्रसाद ने मंगलवार को कहा कि डीएमके ने वीसीके व वामपंथी सहयोगियों को चेन्नई में 1 मार्च को यूएस-इजरायल के ईरान पर हमलों के विरोध में रैली की छूट दी। प्रदर्शनकारी अमेरिकी दूतावास की ओर बढ़े भी।
यह सब तब हुआ जब पीएम मोदी राज्य में थे और गृह मंत्रालय ने 28 फरवरी को मिडिल ईस्ट तनाव पर सतर्कता बरतने को कहा था। प्रसाद बोले, “देश का नीति 140 करोड़ भारतीयों की आवाज है। चुनावी फायदे के लिए एकता का मजा चखना किसी को मंजूर नहीं।”
ऐसे आयोजनों से सांप्रदायिक शांति व कानून ठप होने का डर जताते हुए उन्होंने थोल. थिरुमावलवन व वाम नेताओं की ‘चुनी हुई नाराजगी’ पर तंज कसा। विदेशी धरती पर भारतीयों के दर्द पर चुप्पी, ईरान पर चीखें—यह वोट की राजनीति का नंगा नाच है।
पार्टी ने अमित शाह से तमिलनाडु के शीर्ष अधिकारियों को कड़े निर्देश देने की मांग की ताकि व्यवस्था पंगा न ले।
डीएमके खेमे से चुप्पी, हालांकि वे शांतिपूर्ण विरोध को अभिव्यक्ति का हक मानते हैं।
वैश्विक संकट और देशव्यापी अलर्ट्स के दौर में यह ठनगाड़ी राज्य की सत्ता-विपक्ष जंग को नई ऊंचाई दे रही है।