भारत का रंगीन त्योहार होली देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर में भव्य रूप लेता है। 3 मार्च को होने वाले ‘हरिहर मिलन’ में भगवान शिव और श्रीकृष्ण एक-दूसरे पर गुलाल लगाते हैं। ग्रहण प्रभाव से उत्सव सुबह 5:30 बजे आरंभ होगा, जो देश के अन्य हिस्सों से अलग है।
कथा रावण के भक्ति से शुरू होती है। शिवलिंग हाथ में लेकर लंका जा रहे रावण को देवघर में विष्णु ने ब्राह्मण रूप धारण कर भ्रमित किया। सती हृदय स्थल पर लिंग स्थापित हो गया। इसी स्मृति में हर साल कृष्ण मूर्ति झूले पर झूलती हुई शिव के दर्शन को आती है।
मंदिर पुरोहित मालपुआ चढ़ाते हैं, भक्त नृत्य-गीत में मग्न हो जाते हैं। कन्हैया आनंदित होकर हरि-हर का मिलन रचते हैं। उसके बाद क्षेत्र में होली धूम मच जाती है।
यह अनूठी प्रथा हिंदू एकता का संदेश देती है। लाखों श्रद्धालु साक्षी बनते हैं, जो इस पावन लीला से प्रेरित होकर होली मनाते हैं। देवघर का यह धाम शिव-विष्णु के संगम का जीवंत प्रमाण है।