शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने मिडिल ईस्ट के तनावपूर्ण हालात पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका मानना है कि सैन्य कार्रवाई से कुछ हासिल नहीं होगा, बल्कि बातचीत ही रास्ता है। क्षेत्र में ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच मची तबाही चिंता का विषय बनी हुई है।
मिसाइलें और बमबारी की घटनाएं बढ़ रही हैं। खामेनेई की मौत की अफवाहों ने भारत में शिया मुसलमानों को गमगीन कर दिया है। निरुपम ने केंद्र के अलर्ट को महत्वपूर्ण बताते हुए राज्यों से सावधानी बरतने को कहा। खासकर महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस अलर्ट मोड में रहे।
इसके अलावा, राज्यसभा चुनावों पर महाविकास आघाड़ी की आंतरिक जंग पर उन्होंने सवाल उठाए। चुनाव आने पर गठबंधन में दरारें साफ दिखती हैं। शरद पवार का नाम NCP आगे कर रही है, शिवसेना-यूबीटी और कांग्रेस भी दावेदारी ठोंक रही हैं।
निरुपम बोले, एकता के बिना राज्यसभा में जगह पक्की नहीं हो सकती। कलह से विरोधी लाभान्वित होंगे। वैश्विक संकट के बीच राजनीतिक स्थिरता जरूरी है। निरुपम के विचार आने वाले दिनों की दिशा तय कर सकते हैं।